उल्यूकाएफ़ : भारत में रूसी व्यापारिक प्रतिनिधि कार्यालय की स्थापना बेहद ज़रूरी
रूस के आर्थिक विकास मन्त्री अलिक्सेय उल्यूकाएफ़ से इण्टरव्यू
आप क्या सोचते हैं, ऐसे कौन-कौनसे अन्तरराष्ट्रीय स्तर के मुद्दे हैं, जिनमें ब्रिक्स-दल एक वैश्विक ताक़त के रूप में सामने आया है? किन सवालों पर वह अपनी शर्तें मनवाने की स्थिति में है?
अरे नहीं, ब्रिक्स तो कहीं भी अपनी शर्ते थोपने की कोशिश नहीं करता। अन्तरराष्ट्रीय मंच पर ब्रिक्स-समूह के पाँचों देशों को नैतिक स्तर पर बड़ी उच्चस्तरीय प्रतिष्ठा हासिल है। हमारे पाँचों देश दुनिया के सभी विकासशील देशों के हितों का ख़याल रखते हुए अपने लिए समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे जब जी-20 में अन्तररष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय प्रणाली में सुधार करने के सवाल पर विचार-विनिमय किया गया तो ये पाँचों देश अलग-थलग नहीं पड़ गए थे, बल्कि इन्हें बहुत से देशों का समर्थन हासिल था। इनके पीछे समर्थक देशों की एक पूरी पाँत खड़ी हुई थी। इन देशों में मुख्य रूप से हम अर्जेण्टीना, मैक्सिको, इण्डोनेशिया, मिस्र, सऊदी अरब आदि देशों का नाम ले सकते हैं। ब्रिक्स के देश खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, औद्योगिक उत्पादन, सूचना व संचार तकनीक, अभिनव विकास आदि बहुत से दूसरे विषयों पर आपस में सहयोग करने से जुड़े सवालों की ओर बहुत ध्यान दे रहे हैं।
भारत यूरेशियाई आर्थिक संघ के साथ सक्रिय सहयोग करेगा
नया ब्रिक्स विकास बैंक विश्व बैंक, एशियाई ढाँचागत निवेश बैंक, यूरेशियाई विकास बैंक आदि अन्य वित्तीय संस्थाओं के साथ सहयोग करने की ओर बड़ा ध्यान दे रहा है। इस तरह ब्रिक्स समूह एक ही ढंग से सोचने वाले उन बहुत से देशों को अपनी तरफ़ आकर्षित करने में सफल हुआ है, जो अधिक न्यायसंगत अन्तरराष्ट्रीय रिश्तों और अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक रिश्तों के पक्ष में आवाज़ उठाते हैं।
ब्रिक्स के अन्तर्गत आपसी सहयोग के विकास से जुड़े किन विचारों के साथ रूस गोआ शिखर-सम्मेलन में भाग लेगा?
ब्रिक्स ने इस तरह का कोई उद्देश्य अपने सामने नहीं रखा है कि वह हर साल नई से नई संस्थाओं का गठन करके दुनिया को अचरज में डालेगा। अब हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि हम उन संस्थाओं के काम-काज को ठीक ढंग से चलाएँ, जो हमने अभी तक बनाई हैं। हम ई-कामर्स का विकास तथा मध्यम और लघु व्यवसाय का विकास ख़ूब अच्छी तरह से करना चाहते हैं। हम छोटे और मंझोले आकार की कम्पनियों के लिए विशेष वेबसाइटों और पोर्टलों का निर्माण करना चाहते हैं ताकि इन कम्पनियों की पहुँच सरकारी स्तर पर की जाने वाली ख़रीद तक हो जाए। इसके अलावा हम एक ऐसा दरवाज़ा, एक ऐसी खिड़की भी खोलना चाहते हैं, जिसके माध्यम से हम राष्ट्रीय परियोजनाओं पर अमल करने के अपने-अपने अनुभवों का एक-दूसरे के साथ आदान-प्रदान कर सकें।
चीन ने भी एक बहुत दिलचस्प प्रस्ताव रखा है। उसका कहना है कि ब्रिक्स समूह के अन्तर्गत बैद्धिक सम्पदा के क्षेत्र में आपसी सहयोग की एक प्रणाली बनाई जानी चाहिए। इसके साथ-साथ हम सेवाओं और व्यापार के क्षेत्र में सामने आने वाली शुल्क सम्बन्धी बाधाओं और और अन्य बाधाओं को दूर करने की भारत द्वारा शुरू की गई पहल का भी हर तरह से समर्थन कर रहे हैं।
पिछले साल उफ़ा में ब्रिक्स के नेताओं ने ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग की रणनीति बनाई थी। इसके बाद पिछले एक साल के भीतर इस दिशा में और क्या-क्या किया गया है?
हाँ, यह एक बेहद कठिन और जटिल दस्तावेज़ है, जिस पर अमल करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर और ब्रिक्स देशों के स्तर पर विभिन्न मन्त्रालयों और विभागों के बीच आपस में समन्वय करने की ज़रूरत है। इस आर्थिक राह पर आगे बढ़ते हुए हम इलैट्रोनिक व्यापार से जुड़े मुद्दों पर आपस में सहयोग बढ़ा रहे हैं। रूस की पहल पर ब्रिक्स के सदस्य देशों के विशेषज्ञों के बीच दूसरी भेंट-मुलाक़ात का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिनिधि भी भाग लेंगे और आर्थिक सहयोग के सिलसिले में अपने नज़रियों के बीच दिखाई देने वाले मतभेदों और दूरियों को कम करेंगे।
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ब्रिक्स समूह में शामिल सभी देश लघु और मंझोले व्यापारियों से बड़ी उम्मीद लगाए हुए हैं। दक्षिणी अफ़्रीकी गणराज्य ने तो इस सिलसिले में अपने यहाँ एक विशेष मन्त्रालय भी गठित कर दिया है। इस सिलसिले में चर्चा को आगे बढ़ाते हुए रूस ने लघु और मंझोले उद्योगों को सरकारी ख़रीद और बड़े-बड़े निगमों द्वारा की जाने वाली ख़रीद से जोड़ने का फ़ैसला किया है। लम्बे बहस-मुबाहिसे के बाद बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र में ब्रिक्स समूह के देशों के बीच आपसी सहयोग की प्रणाली पर सहमति हो गई है। व्यापार, सेवाओं और, मानकों और विभिन्न प्रकार की बाधाओं को दूर करने व अन्य बहुत से सवालों पर भी आपसी सहमति हो गई है।
भारत और रूस के बीच व्यापार के विकास की दिशा में क्या प्रगति हुई है? भारत में रूस के व्यापारिक प्रतिनिधि कार्यालय को शुरू करने की परियोजना अब किस दौर में पहुँच चुकी है?
रूस और भारत के बीच व्यापारिक-आर्थिक सहयोग काफ़ी मजबूत है। हालाँकि भूराजनीतिक कारणों से और अनेक आर्थिक कारणों से पिछले दौर में हमारा पारस्परिक व्यापार पहले से घट गया है। सन् 2016 की पहली छमाही में रूस और भारत के बीच व्यापार में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है। लेकिन हमने हालात पर काबू पा लिया है और भारतीय मालों का रूस को निर्यात फिर शुरू हो गया है। हमें उम्मीद है कि रूस द्वारा भारत को किया जाने वाला निर्यात भी आने वाले समय में काफ़ी बढ़ जाएगा। हालाँकि मालों का आयात-निर्यात कम हुआ है, लेकिन उनका मूल्य अब पहले से काफ़ी बढ़ गया है। अब मालों का आयात-निर्यात भी फिर से बढ़ता जा रहा है। पिछले साल रूस से भारत को बने-बनाए और तैयार मालों के निर्यात में 51.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। कच्चे मालों के निर्यात में तो यह बढ़ोतरी क़रीब-क़रीब दुगुनी होकर 90.8 प्रतिशत तक पहुँच गई थी।
आपसी व्यापार को बढ़ाने के लिए हमारे दोनों देशों द्वारा की गई कोशिशों की बदौलत वास्तव में बड़ी प्रगति दिखाई दी। हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन और भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने कुडनकुलम एटमी बिजलीघर के पहले यूनिट को भारत को सौंपने के औपचारिक समारोह में भाग लिया था। कुडनकुलम बिजलीघर का दूसरा यूनिट भी भारत की राष्ट्रीय बिजली वितरण व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है। इन दिनों कुडनकुलम बिजलीघर में तीसरे और चौथे यूनिटों के निर्माण का काम बड़े ज़ोर-शोर से ज़ारी है। हमें उम्मीद है कि अक्तूबर में होने वाली रूस-भारत शिखर-वार्ता के दौरान पाँचवे और छठे यूनिट के निर्माण के बारे में भी दो देशों के बीच आपसी अनुबन्ध पर हस्ताक्षर हो जाएँगे।
रूसी हाई टैक्नोलॉजी कम्पनियों के लिए भारतीय बाज़ार में घुसना आसान
हमारे दो देशों के बीच तेल और गैस के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग काफ़ी बढ़ गया है। भारतीय कम्पनियाँ वनकोर तेल और गैस भण्डार में भारी निवेश करके उसकी 49.9 प्रतिशत की हिस्सेदार हो गई हैं। रूसी कम्पनी रोसनेफ़्त भी भारतीय बाज़ार में घुसने और अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है। रोसनेफ़्त भारतीय कम्पनी एस्सार ऑयल में भारी पूँजी निवेश करके उसकी साझेदार हो गई है। एस्सार ऑयल भारत की सबसे बड़ी तेलशोधक कम्पनी है।
भारत में रूस का व्यापारिक प्रतिनिधि कार्यालय खोलना हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। हम जल्दी से जल्दी इस काम को करना चाहते हैं। आजकल हम भारतीय कानूनों के हिसाब से भारत में रूसी व्यापारिक प्रतिनिधि कार्यालय के पंजीकरण से जुड़ी कार्यवाही और अन्य ज़रूरी वैधानिक कार्यवाही कर रहे हैं। वैसे हमने भारत में काम करना शुरू कर दिया है। रूसी निर्यातकों के लिए हम भारत में बड़ी सक्रियता से भारतीय सहयोगियों की तलाश कर रहे हैं। भारत में लगने वाले पहले ब्रिक्स व्यापार मेले के रूसी मण्डप में रूसी कम्पनियों की सक्रियता से रूसी भारतीय व्यापारिक सम्पर्कों को आगे बढ़ाने और उन्हें काफ़ी व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी। हमें पूरा-पूरा विश्वास है कि नई दिल्ली में होने वाला पहला ब्रिक्स व्यापार मेला रूसी मालों में भारतीय उपभोक्ताओं की दिलचस्पी को काफ़ी बढ़ा देगा।
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रूस और भारत सहित ब्रिक्स देशों के व्यापारियों के बीच सँयुक्त परियोजनाओं का विकास कैसे हो रहा है?
जिन दिशाओं में ब्रिक्स देश आपसी सहयोग के विकास को बड़ी प्राथमिकता दे रहे हैं, वे दिशाएँ हैं — ऊर्जा, खनन उद्योग, वायुयान उद्योग, अन्तरिक्ष, इंजीनियरिंग उद्योग, रेडियो-इलैक्ट्रोनिकी, सूचना तकनीक और चिकित्सा। रोसनेफ़्त, सीलाविए माशिनी, विर्त्याल्योति रस्सी जैसी रूसी कम्पनियाँ ब्रिक्स देशों की कम्पनियों के साथ मिलकर अनेक महत्वाकांक्षी सँयुक्त परियोजनाओं पर अमल कर रही हैं। रूस रेलवे, रोसतेख़, रोसएटम जैसी बहुत-सी दूसरी विशाल और मंझोली रूसी कम्पनियाँ भी अनेक परियोजनाओं पर काम कर रही हैं।
नई दिल्ली में होने जा रहे पहले ब्रिक्स व्यापार मेले से हमें भारी उम्मीदें हैं। इस मेले में रूसी कम्पनियाँ ब्रिक्स देशों की कम्पनियों के साथ सीधे व्यापारिक सम्पर्क स्थापित कर पाएँगी। हम लोग आजकल मेले में भाग लेने की और ब्रिक्स व्यापार मेले के दौरान होने वाले सम्मेलनों और सिम्पोजियमोम में भाग लेने की तैयारियाँ कर रहे हैं।
ब्रिक्स समूह के वर्तमान अध्यक्ष भारत के साथ हम जिन समझौतों और अनुबन्धों पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, उनमें से कुछ हैं — मुक्त व्यापार समझौता, नया निवेश समझौता, राष्ट्रीय मुद्राओं में पारस्परिक हिसाब-किताब करने से जुड़ा व्यापक समझौता, ’उत्तर-दक्षिण’ गलियारे यानी मुम्बई से साँक्त पितेरबुर्ग (सेण्ट पीटर्सबर्ग) तक जाने वाले नए रेलमार्ग के बारे में समझौता और कस्टम सुविधाओं के बारे में ’हरा गलियारा’ समझौता। हम अपने दो देशों के बीच आर्थिक स्थितियों और निवश स्थितियों को बहुत बेहतर बनाने के लिए पूरी-पूरी कोशिश कर रहे हैं और मुझे विश्वास है कि हमारी इन कोशिशों की बदौलत सन् 2025 तक रूस और भारत का आपसी व्यापार बढ़कर 30 अरब डालर तक पहुँच जाएगा तथा आपसी निवेश भी बढ़कर 15 अरब डॉलर हो जाएगा।
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